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कब्ज़ के लक्षण और घरेलू इलाज – Qabz Ka Ilaj – Home Remedies for Constipation in Hindi

कब्ज़ के लक्षण और घरेलू इलाज – Qabz Ka Ilaj – Home Remedies for Constipation in Hindi StylecrazeNovember 1, 2019

आज फिर पेट अच्छे से साफ नहीं हुआ। अब दिनभर गैस, एसिडिटी, पेट में भारीपन, सिरदर्द और न जाने क्या कुछ सहना पड़ेगा। अमूमन 60 प्रतिशत लोगों के दिन की शुरुआत कुछ इसी तरह होती है। इस बात से आप भी इनकार नहीं करेंगे कि अगर पेट ख़राब, तो समझो दिन भी ख़राब। आज के समय में कब्ज़ ऐसी समस्या है, जो लगभग हर बीमारी की जड़ है। कई बार तो समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि जान पर बन जाती है। ख़ैर, अब आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि आज हम इस लेख में कब्ज़ के रामबाण इलाज लेकर आए हैं। इनकी मदद से आप कब्ज़ को जड़ से खत्म कर सकते हो।

इससे पहले कि हम कब्ज़ के रामबाण इलाज की चर्चा करें, उससे पहले हमारे लिए यह जानना ज़रूरी है कि आखिर कब्ज़ क्या है, क्यों है और इसके लक्षण क्या हैं।

कब्ज़ क्या है – What is Constipation in Hindi

जब हमारा पाचन पंत्र ख़राब हो जाता है और मल त्याग करते समय कठिनाई होती है या फिर ज़ोर लगाना पड़ता है, उस स्थिति को कब्ज़ कहते हैं। इस अवस्था में मल सख्त व सूखा आता है। कई बार तो मल त्याग करते समय पेट व गुदे में दर्द भी होता है। वैज्ञानिक तौर पर एक हफ़्ते में तीन बार से कम शौच आने को कब्ज़ माना जाता है। यह समस्या किसी को भी, किसी भी आयु में हो सकती है। कभी यह कुछ समय के लिए होती है, तो कभी लंबे समय तक चलती है ()। कब्ज़ के कारण गैस, एसिडिटी, बवासीर, गुदाचीर व हर्निया जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।

अब जानते हैं कि किन परिस्थितियों में माना जाता है कि कब्ज़ हो गई है।

कब्ज़ के लक्षण – Symptoms of Constipation in Hindi

  • हाजमा खराब होना
  • सिरदर्द होना
  • गैस बनना
  • भूख कम होना
  • आंखों में जलन होना
  • कमज़ोरी महसूस होना
  • जी-मिचलाना
  • चेहरे पर मुंहासे निकल आना
  • शौच के बाद लगना कि पेट साफ नहीं हुआ
  • पेट में भारीपन महसूस होना
  • पेट में मरोड़ पड़ना
  • जीभ का रंग सफ़ेद या मटमैला हो जाना
  • मुंह से बदबू आना
  • कमर दर्द होना
  • मुंह में छाले हो जाना
  • कभी-कभी चक्कर आना

हमारे लिए यह जानना भी जरूर है कि कब्ज़ कितने प्रकार की हो सकती है।

कब्ज के प्रकार – Types of Constipations in Hindi

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कब्ज़ ऐसी बीमारी है, जो किसी को भी शारीरिक व मानसिक तौर पर तोड़कर रख देती है। इस बीमारी से पीड़ित शख़्स के लिए घर, ऑफ़िस या फिर किसी अन्य जगह लोगों के साथ उठना-बैठना मुश्किल हो जाता है। मुख्य रूप से कब्ज़ को दो प्रकार का माना गया है।

पुरानी कब्ज़ :जब मल त्याग ठीक से नहीं होता या फिर कम होता है और कठिनाई से होता है। साथ ही मल सख्त होता है। इसके अलावा, शौच के बाद भी लगता है कि अभी संतुष्टि नहीं हुई है।

गंभीर कब्ज़ :इस स्थिति में मल बिल्कुल भी नहीं निकलता है। यहां तक कि गैस तक भी बाहर नहीं निकलती है। इस तरह की कब्ज़ को बेहद गंभीर माना गया है और मरीज को जल्द से जल्द इलाज की ज़रूरत होती है।

इस लेख का यह हिस्सा बेहद अहम है। यहां हम जानेंगे कब्ज़ के कारणों के बारे में।

कब्ज़ के कारण – Causes of Constipation in Hindi

मुख्य रूप से कब्ज़ हमारी जीवनशैली और खानपान से जुड़ी है। जब हमारे शरीर में फाइबर व पानी की मात्रा कम हो जाती है, तो आंत के लिए भोजन को पचान मुश्किल हो जाता है। इसलिए, मल सख्त हो जाता है और कब्ज़ हो जाती है। ऐसे ही कुछ अन्य कारणों पर नज़र डालते हैं।

कम फाइबर युक्त भोजन का सेवन :फाइबर वह चीज़ है, जो भोजन के साथ आंतों में जाकर अपनी जगह बना लेता है। यह भोजन को पचाने में आंतों की मदद करता है। जब भोजन में इसकी कमी हो जाती है, तो कब्ज़ की समस्या शुरू हो जाती है।

द्रव्य पदार्थों का कम सेवन :फाइबर को काम करने के लिए द्रव्य पदार्थों की ज़रूरत होती है और यह काम पानी बेहतर तरीके से करता है। जब आप पानी कम पीते हैं, तो आंतें सूख जाती हैं और कब्ज़ हो जाती है।

दवाइयों पर निर्भरता :पेट में दर्द हुआ तो दवाई खा ली या फिर सिरदर्द के लिए कोई भी दवा खा लेते हैं। इसी तरह से छोटी-छोटी बीमारियों के लिए दवा खाने से विभिन्न तरह के साइड इफेक्ट्स होते हैं और कब्ज़ उनमें से एक है।

गर्भावस्था के दौरान :अक्सर गर्भवती महिलाओं को इन नौ महीनों के दौरान कब्ज़ हो जाती है। ऐसा प्रोजेस्ट्रोन हार्मोंस का स्राव होने के कारण होता है, जिससे मांसपेशियों में संकुचन होता है और आंतों तक भोजन धीमी गति से पहुंचता है ()। इसके अलावा, गर्भवती महिलाएं अतिरिक्त आयरन का सेवन करती हैं, जिससे कारण भी कब्ज़ होती है। आमतौर पर यह समस्या गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही होती है, लेकिन इसके बाद भी रहने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

हाइपोथायरायडिज्म :हाइपोथायरायडिज्म को थायराइट का ही प्रकार माना गया है। यह हार्मोन की कमी होने के कारण होता है। इस बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है। जैसे-जैसे मेटाबॉलिज्म कम होता जाता है, वैसे-वैसे यह समस्या बढ़ती जाती है और थकान, तेजी से वज़न बढ़ाना व कब्ज़ का सामना करना पड़ता है ()।

शारीरिक श्रम की कमी :आज के दौर में हमने शारीरिक गतिविधियों को कम कर दिया है। आधुनिक सुविधाओं ने हमें आलसी बना दिया है। इस कारण हमारा मेटाबॉलिज्म ख़राब हो जाता है और कब्ज़ से जूझना पड़ता है।

स्वास्थ्य अनुपूरक :हम पौष्टिक भोजन से ज्यादा स्वास्थ्य अनुपूरक (हेल्थ सप्लीमेंट्स) पर ज्यादा ज़ोर देते हैं। मुख्य रूप से आयरन और कैल्शिय के सप्लीमेंट्स ज़्यादा खाए जाते हैं , जो कब्ज़ का कारण बनते हैं।

तनाव :बेशक, यह पढ़कर आपको हैरानी होगी, लेकिन सच्चाई यही है कि तनाव भी कब्ज़ का मुख्य कारण है। कभी आप ग़ौर करना, जिस दिन आप पर ऑफिस का दबाव या फिर किसी अन्य तरह का तनाव होगा, तब आपको कब्ज़ की समस्या से जूझना पड़ सकता है।

मूत्र को रोकना :अक्सर देखा गया है कि हम ऑफिस के काम में इतना व्यस्त होते हैं कि मूत्र को काफ़ी देर तक रोककर रखते हैं, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। इससे न सिर्फ मूत्र मार्ग से संबंधित रोग हो सकता है, बल्कि कब्ज़ की भी समस्या हो सकती है।

आईबीएस :इसे इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम यानी आंत का रोग कहते हैं। इसमें आंत के काम करने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और कब्ज़ की समस्या घेरने लगती है।

नींद की कमी :इस भागदौड़ भरे जीवन में काम का इतना दबाव है कि हम भरपूर नींद तक नहीं सो पाते हैं। पर्याप्त नींद न लेने के कारण पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता और कब्ज़ हो जाती है।

नीचे हम बताने जा रहे हैं कि कब्ज़ होने से क्या-क्या समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं।

कब्ज़ होने से नुकसान – Side Effects Constipation in Hindi

  • पेट में भारीपन व जलन
  • भूख न लगना
  • उल्टी
  • छाती में जलन
  • बवासीर, भगंदर, फिशर
  • आंतों में जख्म व सूजन

आप जान चुके हैं कि कब्ज़ क्या है, उसके लक्षण क्या हैं और यह किन कारणों से होती है। अब यह जानना भी ज़रूरी है कि कब्ज़ का रामबाण इलाज क्या है। यहां पढ़िए, पुरानी से पुरानी कब्ज़ का इलाज।

कब्ज़ का घरेलू इलाज – Home Remedies for Constipation in Hindi

कब्ज़ कैसे दूर करें, इसके लिए आपको ज़्यादा सोचने की ज़रूरत नहीं है। इसके लिए कुछ घरेलू उपचार हैं, जिनके प्रयोग से न सिर्फ आपाका पेट ठीक होगा, बल्कि आप खुद को तरोताज़ा भी महसूस करेंगे।

1. पानी

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सामग्री :

  • एक जग पानी
  • एक-दो नींबू
  • नमक

बनाने की विधि :

  • सुबह उठते ही पानी को अच्छी तरह उबाल लें।
  • जब पानी हल्का गुनगुना हो जाए, तो इसमें नींबू मिक्स करें। अगर कब्ज़ ज़्यादा पुरानी है, तो पानी में दो नींबू डाल सकते हैं। अन्यथा एक नींबू ही पर्याप्त है। साथ ही स्वादानुसार नमक घोलें।
  • अब एक जगह बैठ जाएं और जितना हो सके पानी को घूंट-घूंट करके पिएं।
  • इसके बाद खुली जगह पर 15-20 मिनट टहलना शुरू करें। कुछ ही देर में आपका प्रेशर बन जाएगा और शौच खुलकर आएगा।

कब करें सेवन :

जब तक आपकी कब्ज़ पूरी तरह से ठीक न हो जाए, इसे लेते रहें। अगर आप इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें, तो और बेहतर होगा।

इस तरह है लाभकारी :

नींबू के रस में साइट्रिक एसिड होता है () और नमक में सोडियम क्लोराइड होता है। जब नींबू व नमक, पानी के साथ शरीर के अंदर जाते हैं, तो पेट को साफ करने की क्षमता बढ़ जाती है। जैसे किसी केमिकल से बर्तन को साफ किया जाता है, उसी तरह पानी, नमक व नींबू का घोल आंतों को साफ करता है। वहीं, दिनभर में आठ-दस गिलास पानी ज़रूर पीना चाहिए, ताकि आंतों को भोजन पचाने में आसानी हो ()।

2. अरंडी का तेल

सामग्री :

  • एक चम्मच अरंडी का तेल
  • आधा नींबू का रस
  • एक गिलास पानी

बनाने की विधि :

  • आप सुबह खाली पेट एक चम्मच अरंडी के तेल का सेवन कर सकते हैं।
  • अगर इस तरह से लेना संभव नहीं हो, तो एक गिलास गुनगुने पानी में इसे नींबू के साथ मिलाकर ले सकते हैं।

कब करें सेवन :

इसे कुछ दिनों के लिए नियमित रूप से ले सकते हैं।

इस तरह है लाभकारी :

जब आप इसे खाली पेट लेते हैं, तो यह तेल चमत्कारी तरीके से काम करता है। यह पेट में जाकर मल को पतला व मुलायम कर देता है, जिस कारण कुछ ही घंटों बाद शौच के समय पेट पूरी तरह साफ हो जाता है ()।

नोट :डॉक्टर से सलाह लिए बिना इस तेल को सात दिन से ज़्यादा नहीं लेना चाहिए।

3. पपीता

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सामग्री :

  • एक कटोरी पपीता
  • एक गिलास दूध

बनाने की विधि :

  • रोज सुबह एक कटोरी पपीता खाली पेट या फिर दिन में किसी भी समय खा सकते हैं।
  • इसे मिक्सी में दूध के साथ मिक्स करके, शेक बनाकर भी पी सकते हैं। बेहतर होगा कि शेक में चीनी न डालें।

कब करें सेवन :

अगर पपीते को रात का भोजन करने के बाद सोने से पहले खाया जाए, तो अच्छे से असर करता है।

इस तरह है लाभकारी :

पपीते को गुणों का भंडार माना गया है। इसमें एक साथ कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता है। इसे कब्ज़ की दवा कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। पपीता कच्चा हो या पका हुआ, हर तरह से लाभकारी है। कोई इसे खाता हैं, तो कोई शेक की तरह पीता है। यह आंतों के लिए ल्यूब्रिकेट का काम करता है यानी मल को मुलायम कर पेट को साफ करता है। इसके रस में पपाइन नामक तत्व होता है, जो भोजन को पचाता है। इसमें विटामिन-बी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। साथ ही इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व होता है, जो सेहत के लिए अच्छा है। यह गुणकारी फल शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है () ()।

4. अलसी के बीज

सामग्री :

  • अलसी के बीज
  • एक गिलास पानी

बनाने की विधि :

  • अलसी के बीजों को मिक्सी में डालकर पीस लें।
  • अब करीब 20 ग्राम पाउडर को पानी में डालकर मिक्स करें और तीन-चार घंटे बाद पानी को छानकर पी जाएं।

कब करें सेवन :

जब भी कब्ज़ महसूस हो, इसका सेवन कर सकते हैं।

इस तरह है लाभकारी :

अलसी को कब्ज़ की आयुर्वेदिक दवा माना गया है। इसमें में सॉल्युबल फाइबर पाया जाता है, जो हमारी आंतों को साफ कर कब्ज़ से राहत दिलाने में कारगर है। इसमें फाइबर ज़्यादा और कार्बोहाइड्रेट कम होता है, जिस कारण यह पाचन तंत्र को दुरुस्त कर खाने को हजम करने में मदद करता है। अलसी में कई एंटी-ऑक्सीडेंट्स गुण भी पाए जाते हैं, जो शरीर में हार्मोन को नियंत्रित रखते हैं। इस लिहाज से हम कह सकते हैं कि अलसी कब्ज़ के लिए रामबाण इलाज है ()।

5. बेकिंग सोडा

सामग्री :

  • एक चम्मच बेकिंग सोडा
  • एक गिलास गुनगुना पानी

बनाने की विधि :

  • पानी में बेकिंग सोडा मिलाएं और पी जाएं।
  • आप महसूस करेंगे कि इसे पीने के कुछ देर बाद ही प्रेशर बनने लगेगा और पेट साफ हो जाएगा।

कब करें सेवन :

इसे खाली पेट पीने से ज़्यादा लाभ होता है।

इस तरह है लाभकारी :

कब्ज़ की दवा के रूप में बेकिंग सोडा सबसे कारगर, गुणकारी व सस्ता है। यह पेट में जाते ही भोजन नलिकाओं में से एसिडिटी को कम करता है और सूजन को खत्म करता है ()। यह हर उम्र के लोगों के लिए फ़ायदेमंद है, लेकिन छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को डॉक्टर से पूछे बिना नहीं देना चाहिए।

6. शहद

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सामग्री :

  • थोड़ा-सा शहद
  • आधा नींबू
  • एक गिलास गुनगुने पानी

बनाने की विधि :

  • आप चाहें तो सुबह खाली पेट एक चम्मच शहद खा सकते हैं।
  • इसके अलावा, गुनगुने पानी में शहद और नींबू मिलाकर पी सकते हैं।

कब करें सेवन :

आप प्रतिदिन सुबह इनका सेवन कर सकते हैं। शहद की हर्बल टी भी बनाकर पी सकते हैं।

इस तरह है लाभकारी :

शहद को प्राकृतिक व गुणकारी माना गया है। भारत में प्राचीन काल से इस उपयोग दवा के तौर पर किया जा रहा है। आयुर्वेद में भी शहद के कई लाभ बताए गए हैं। इसक प्रयोग शरीर के घाव भरने और कैंसर के इलाज तक में किया जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीमाइक्रोबियल व एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो कब्ज़ को ठीक करने में उपयोगी साबित होते हैं। यह मॉश्चराइज़िंग से भरपूर होता है और आंतों को साफ करने के लिए ल्यूब्रिकेंट का काम करता है। आधुनिक वैज्ञानिक जांच में भी शहद के इन गुणों का वर्णन करते हुए सही बताया गया है ()।

7. दूध

सामग्री :

  • एक गिलास गर्म दूध
  • गाय का घी या फिर गुड़

बनाने की विधि :

  • गर्म दूध में गाय का घी या फिर गुड़ डालकर मिला लें और इसका सेवन करें।

कब करें सेवन :

इसे कुछ दिन तक रात को सोने से पहले पीना चाहिए।

इस तरह है लाभकारी :

दूध में कैल्शियम, पोटेशियम, विटामिन-डी और प्रोटीन पाया जाता है। जहां दूध पीने से हड्डियां मज़बूत होती है, वहीं पाचन तंत्र भी ठीक से काम करता है। कब्ज़ होने की स्थिति में ठंडे की जगह गर्म दूध पीना लाभकारी होता है।

8. त्रिफला

सामग्री :

  • दो चम्मच त्रिफला चूर्ण
  • एक गिलास गुनगुना पानी

बनाने की विधि :

  • त्रिफला चूर्ण को गर्म पानी में अच्छे से मिला लें और रात को सोने से पहले इसे पी लें।
  • इसे पीने के बाद कुछ न खाएं। करीब आधे घंटे बाद सिर्फ पानी पी सकते हैं।

कब करें सेवन :

सिर्फ कुछ दिन ही इसका सेवन करना है।

इस तरह है लाभकारी :

आंवला, हरड़ व बहेड़ा नामक तीन फलों को समान मात्रा में मिलाकर त्रिफला चूर्ण बनाया जाता है। यह कब्ज़ को ठीक करने की बेहद पुरानी आयुर्वेदिक औषधी है। इसका सेवन करने से पाचन तंत्र ठीक होता है और पुरानी से पुरानी कब्ज़ आराम से ठीक हो जाती है। साथ ही यह पेट के अंदर मांसपेशियों को स्वस्थ करता है ()।

9. विटामिन

सामग्री :

  • विटामिन-सी टैबलेट
  • विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स कैप्सूल

कैसे करें प्रयोग :

  • विटामिन-सी टैबलेट को एक गिलास पानी में मिला कर पी जाएं।
  • इसी मिश्रण के साथ विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स कैप्सूल भी ले सकते हैं।

कब करें सेवन :

इन्हें कुछ दिनों के लिए प्रतिदिन लें।

इस तरह है लाभकारी :

देखा गया है कि विटामिन-सी कब्ज़ के प्रभाव को कम करने में सक्षम है और पेट संबंधी रोगों को डिटॉक्सीफाई करता है। साथ ही भोजन नली को दुरुस्त कर, उसे ठीक से काम करने के लिए प्रेरित करता है। विटामिन-सी शरीर से अस्वस्थ टॉक्सिन को बाहर निकाल देता है। साथ ही आंत में जमे हुए अपाच्य तत्व को भी साफ कर देता है। वहीं, विटामिन-बी कॉम्लेक्स कैप्सूल में बी-1, बी-5, बी-9 और बी-12 जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो पेट को साफ करने में मदद करते हैं () ()।

10. अमरूद

सामग्री :

  • 250 ग्राम अमरूद
  • 10 मिली अमरूद के पत्तों का रस
  • या फिर
  • एक अमरूद
  • थोड़ी-सी शक्कर

बनाने की विधि :

प्रक्रिया नंबर-1

  • रोज़ सुबह खाली पेट अमरूद खाएं और उसके बाद एक गिलास गर्म दूध पी सकते हैं या फिर किशमिश भी खा सकते हैं।
  • इसके अलावा, अमरूद के पत्तों के रस में थोड़ी-सी शक्कर मिलाकर रोज़ पीने से पुरानी से पुरानी कब्ज़ ठीक हो जाती है।

प्रक्रिया नंबर-2

  • अमरूद में से बीज निकालकर उसे बारीक-बारीक काट लें।
  • अब इसे शक्कर के साथ धीमी आंच पर पकाकर चटनी बना लें।
  • इस चटनी का सेवन करने से कब्ज़ ठीक हो जाती है।

कब करें सेवन :

कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन करें।

इस तरह है लाभकारी :

कब्ज़ व पेट से जुड़ी बीमारियों के लिए अमरूद को गुणकारी फल माना गया है। इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह कब्ज़ में तेज़ी से असर करता है। अमरूद को विटामिन-सी का मुख्य स्रोत माना गया है () ()। इसे काले नमक के साथ खाने से पचन तंत्र मज़बूत होता है। कहा जाता है कि अमरूद के बीजों को चबा-चबा कर खाना चाहिए, तभी पेट संबंधी रोग से राहत मिलती है। कब्ज़ के रोगियों को सुबह खाली पेट या फिर खाने से पहले अमरूद खाने की सलाह दी जाती है।

11. हर्बल-टी

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सामग्री :

  • हर्बल-टी की पत्तियां
  • पानी

बनाने की विधि :

  • पानी को उबाल लें और उसमें हर्बल चाय की पत्तियां डाल दें।
  • करीब 30 मिनट बाद इसे छानकर पी जाएं।

कब करें सेवन :

कब्ज़ की दवा के तौर पर दिनभर में इसके तीन-चार कप पी सकते हैं।

इस तरह है लाभकारी :

हर्बल-टी को प्राकृतिक लैक्सटिव (पेट साफ करने की दवा) माना गया है। इसके सेवन से मल त्याग करने में आसानी होती है ()। इसमें शहद व गुड़ को मिलाया जा सकता है, जिससे हर्बल-टी के फायदे तो बढ़ते ही हैं, साथ ही इसका स्वाद भी अच्छा हो जाता है। अगर घर में किसी बच्चे को कब्ज़ है, तो उसे भी हर्बल-टी दी जा सकती है। हर्बल-टी कई प्रकार की हो सकती हैं। आप अपने स्वादानुसार किसी को भी चुन सकते हैं।

  • ग्रीन-टी
  • पुदीना-टी
  • ब्लैक-टी

12. जैतून का तेल

सामग्री :

  • दो चम्मच जैतून का तेल

बनाने की विधि :

  • रोज़ सुबह खाली पेट जैतूल का तेल पीना चाहिए।

कब करें सेवन :

जब तक आपकी कब्ज़ की समस्या दूर न हो जाए, इसका सेवन करते रहें।

इस तरह है लाभकारी :

जैतून का तेल मल को मुलायम करता है, जिससे मल त्याग करते समय जोर लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती और पेट आसानी से साफ हो जाता है ()। इस तेल का प्राकृतिक गुण है कि यह आंत की दीवारों को कवर कर लेता है, जिससे मल त्याग करने में परेशानी नहीं होती। इसे खाली पेट लेने के साथ-साथ भोजन बनाने में भी प्रयोग किया जा सकता है।

13. आलू बुखारे का जूस

सामग्री :

  • दो गिलास आलू बुखारे का जूस

बनाने की विधि :

  • एक गिलास जूस सुबह व एक गिलास रात को पिएं।
  • जूस पीने की जगह आप आलू बुखारे को खा भी सकते हैं।

कब करें सेवन :

सिर्फ एक दिन ही इसका सेवन करने से आपको कब्ज़ से राहत मिल सकती है।

इस तरह है लाभकारी :

आलू बुखारे में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, इसलिए यह कब्ज़ के लिए रामबाण इलाज है। इसमें कई ज़रूरी विटामिन्स व मिनरल्स पाए जाते हैं, जो पेट के लिए लाभकारी हैं। साथ ही यह पेट के लिए एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है ()।

सावधानी :इस जूस का एक गिलास सुबह व एक रात में ही लें। अगर इसे कम अंतराल में लेते हैं, तो दस्त लग सकते हैं।

14. किशमिश

सामग्री :

  • दो कप पानी
  • 150 ग्राम गहरे रंग की किशमिश

बनाने की विधि :

  • किसी बर्तन में पानी डालकर उबाल लें।
  • फिर किशमिश को धोकर उसमें डाल दें और रातभर के लिए छोड़ दें।
  • अगली सुबह पानी को छान लें और इसे हल्का गर्म करके खाली पेट पिएं।
  • इसके करीब आधे घंटे बाद ही नाश्ता करें।

कब करें सेवन :

इसे करीब चार दिन तक करें। ऐसा महीने में एक बार कर सकते हैं।

इस तरह है लाभकारी :

किशमिश देखने में भले ही छोटी-सी लगे, लेकिन इसके फायदे कमाल के हैं। इसे खाने से न सिर्फ शरीर में खून बनता है, बल्कि कब्ज़ में भी लाभकारी है। नियमित रूप से इसका पानी पीने से लीवर मज़बूत होता है और जब लीवर ठीक से काम करेगा, तो कब्ज़ होने का मतलब ही नहीं बनता। किशमिश में एंटऑक्सीडेंट, कई विटामिन व मिनरल्स पाए जाते हैं () ()।

15. नारियल तेल

सामग्री :

  • एक चम्मच नारियल तेल

बनाने की विधि :

  • आधा चम्मच नारियल तेल को सुबह और आधा चम्मच नारियल तेल को रात के खाने में मिक्स कर सेवन करें।

कब करें सेवन :

अगर जल्दी आराम चाहते हैं, तो तीन-चार दिन तक लगातार इस्तेमाल करें।

इस तरह है लाभकारी :

नारियल तेल में फैटी एसिड पाया जाता है, जो पेट साफ करने में मदद करता है और शौच त्यागने की प्रक्रिया को नियमित करता है। अगर किस को पुरानी कब्ज़ है, तो उन्हें इसका नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।

नोट :नारियल तेल का प्रतिदिन तय मात्रा से ज़्यादा सेवन नहीं करना चाहिए, वरना दस्त लग सकते हैं।

अभी तक हमने बात की उन घरेलू उपचारों की, जो कब्ज़ से राहत दिलाने में कारगर हैं। आगे हम जानेंगे कि कब्ज़ से निपटने के लिए क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।

कब्ज़ में क्या खाएं और क्या न खाएं – Diet for Constipation in Hindi

अगर हमारा खानपान संतुलित रहेगा, तो हमें किसी भी तरह का रोग नहीं हो सकता है। इसलिए, आप जो भी खाएं साफ और स्वच्छ होना चाहिए। यहां हम आपको बताते हैं कि कब्ज़ न हो उसके लिए किन-किन चीज़ों को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए ()।

इन्हें खाने से होगा लाभ :

  1. फलियां :अन्य सब्जियों के मुकाबले इसमें अत्याधिक मात्रा में फाइबर होता है। इसे आप या तो सूप में डालकर खा सकते हैं या फिर इसकी सलाद भी बना सकते हैं। फलियों की सब्जी भी बनती है।
  1. फल :वैसे तो फल खाना हर तरह से लाभकारी है, लेकिन पपीता, सेब, केला व अंगुर ऐसे फल हैं, जो कब्ज़ को तुरंत ठीक कर देते हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है, जो पेट को साफ करने में मदद करता है। डायबिटीज़ के मरीज़ इन फलों का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह ज़रूर ले लें।
  1. सूखे मेवे :किशमिश, अखरोट, अंजीर व बादाम जैसे सूखे मेवों में अधिक फाइबर होता है। नियमित रूप से इनका सेवन करने से कब्ज़ ठीक होने लगती है। इन्हें रात को भिगोकर सुबह खाने से ज़्यादा फायदा होता है।
  1. पॉपकॉर्न :पॉपकॉर्न को फाइबर और कैलोरी का स्रोत माना जाता है। पॉपकॉर्न को स्नैक के तौर पर खाने से कब्ज़ से राहत मिलती है। यहां आपके लिए यह जानना भी ज़रूरी है कि बाज़ार में मिलने वाले फ्लेवर पॉपकॉर्न में कोई भी प्राकृतिक गुण नहीं होता, उल्टा ये कब्ज़ का कारण बनते हैं।
  1. ओटमील :ओट्स में वसा कम मात्रा में होती है, जबकि बीटा ग्लूकॉन नाम विशेष प्रकार का फाइबर होता है। इसके अलावा, ओट्स में आयरन, प्रोटीन व विटामिन-बी1 भी पाया जाता है।
  1. द्रव्य पदार्थ :अगर आप कब्ज़ से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहते हैं, तो अधिक से अधिक तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए। दिनभर में कम से कम आठ-दस गिलास पानी तो ज़रूर पीना ही चाहिए। इसके अलावा, विभिन्न तरह के फलों व सब्जियों का जूस पिया जा सकता है। इससे आंतों को भोजन पचाने में दिक्कत नहीं आती और शरीर हमेशा हाइड्रेट रहता है।

इनसे बनाएं दूरी :

  1. तले हुए खाद्य पदार्थ :चिप्स व चाट-पकौड़ी जैसी चीज़ें खाने से पेट का हाजमा खराब हो जाता है और कब्ज़ की शिकायत होती है।
  1. शक्कर युक्त पेय पदार्थ :कोल्ड ड्रिक्स या फिर चीनी से बने शरबत पेट को खराब करते हैं।
  1. चाय-कॉफी :जिन्हें कब्ज़ हो, उन्हें चाय व कॉफी से भी परहेज करना चाहिए।
  1. जंक फूड :पास्ता, बर्गर, पिज्ज़ा या फिर माइक्रोवेव में बने खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए।
  1. शराब व धूम्रपान :धूम्रपान करने से हमारा पाचन तंत्र खराब हो जाता है। धूम्रपान का सीधा असर हमारी छोटी व बड़ी आंत पर पड़ता है, जिस कारण कब्ज़ होती है ()। वहीं शराब पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है और कब्ज़ का सामना करना पड़ता है ()।

खानेपीने में क्या सावधानी बरतें, यह जानने के बाद आइए अब पता करते हैं कि कौन-कौन से योग किए जाएं, ताकि यह समस्या जड़ से खत्म हो जाए।

कब्ज़ के लिए योगासन – Yoga for Constipation in Hindi

योगासन से कोई भी बीमारी ठीक हो सकती है। जब आप इसे करना शुरू करते हैं, तभी से आपको असर महसूस होने लगेगा। आज हम आपको बताते हैं कि कब्ज़ के लिए कौन-कौन से योगासन करने उचित हैं ()।

1. मयूरासन :

जिन्हें कब्ज़ है, उनके लिए मयूरासन से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इससे पाचन क्रिया ठीक होती है और गैस, कब्ज़ व पेट में दर्द जैसी समस्या दूर होती हैं।

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करने की प्रक्रिया :

  • घुटनों के बल बैठ जाएं और आगे की तरफ झुक जाएं।
  • हथेलियों को एक साथ जमीन पर सटाते हुए दोनों कोहनियों को नाभी पर टिकाएं और संतुलन बनाते हुए घुटनों को सीधा करने की कोशिश करें।
  • इस आसन को एक बार में करना कठिन है, लेकिन नियमित अभ्यास से इसे किया जा सकता है।

सावधानी :जिन्हें उच्च रक्तचाप, टीबी या फिर ह्रदय संबंधी कोई बीमारी हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।

2. अर्ध मत्स्येंद्रासन :

इस आसन को करने से भी कब्ज़ में राहत मिलती है।

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करने की प्रक्रिया :

  • जमीन पर बैठ जाएं और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
  • अब दाएं पैर को मोड़ते बाएं तरफ ले जाएं और एढ़ी को कुल्हे से स्पर्श करने का प्रयास करें। वहीं, बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं पैर के ऊपर से ले जाते हुए तलवे को जमीन से सटा लें।
  • अब दाएं हाथ को जांघ व पेट के बीच में ले जाते हुए बाएं पैर को छूने की कोशिश करें और बाएं हाथ को पीछे की ओर ले जाएं (जैसा फोटो में दर्शाया गया है)।
  • इसके बाद कमर, कंधों व गर्दन को बाईं ओर मोड़ते हुए बाहिने कंधे के ऊपर से देखने की कोशिश करें।
  • इस दौरान, लंबी व गहरी सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • अब सांस छोड़ते हुए दाएं हाथ, कमर, गर्दन व छाती को ढीला छोड़ते हुए सामान्य मुद्रा में आ जाएं और दूसरी तरफ से इसी प्रक्रिया को दोहराएं।

सावधानी :गर्भवती महिलाओं और जिन्हें रीढ़ की हड्डी, गर्दन व कमर में दर्द हो या फिर एसिडिटी की परेशानी हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।

3. हलासन :

यह कब्ज़ ठीक करने के साथ-साथ मोटापे को भी कम करता है।

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करने की प्रक्रिया :

  • जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं और पैरों व हाथों को सीधा रखें।
  • अब शरीर को कमर की तरफ से मोड़ते हुए पैरों को सीधा 90 डिग्री तक उठाने की कोशिश करें।
  • सांस छोड़ते हुए कमर को पूरा मोड़ें और पैरों को पीछे ले जाते हुए अंगुठों को जमीन से स्पर्श करने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड इसी स्थिति में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं।

4. पवनमुक्तासन :

यह लीवर को मज़बूत कर पाचन तंत्र को ठीक करता है और कब्ज़, गैस व एसिडिटी से राहत देता है।

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करने की प्रक्रिया :

  • जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। पहले दाहिनी पैर को घुटने से मोड़ें और दोनों हाथों को आपसे में जोड़ते हुए घुटने को पकड़ लें।
  • अब सांस लेते हुए घुटने को छाती से लगाने की कोशिश करें और फिर सांस छोड़ते हुए गर्दन उठाते हुए नाक को घुटने से लगाने का प्रयास करें।
  • कुछ सेकंड इस स्थिति में रहने के बाद सांस लेते हुए वापस सामान्य मुद्रा में आ जाएं और इस तरह से सांस लें कि पेट पूरा फूल जाए और सांस छोड़ें तो पेट पूरा अंदर चला जाए।
  • यह प्रक्रिया बाएं पैर से और फिर दोनों पैरों के साथ करें।

सावधानी :जिसे कमर या घुटनों में दर्द हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। साथ ही सुबह खाली पेट या फिर भोजन करने के पांच घंटे बाद इसे करें।

5.






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Date: 01.12.2018, 18:26 / Views: 83171